अनुलोम विलोम प्राणायाम के 100 फायदे और नुकसान: Anulom Vilom ke fayde aur nuksan

इस लेख में हम जानेंगे की अनुलोम विलोम (नाड़ी शोधन) प्राणायाम के फायदे क्या होते हैं और साथ ही इसके नुकसान के बारे में भी जरूर चर्चा करेंगे। इस धरती पर जीने वाला हर व्यक्ति यही चाहता है कि वह हमेशा स्वस्थ तथा निरोग रहे और कभी भी कोई बीमारी उसे छू ना सके। पर ऐसा नहीं होता क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ हमें कोई ना कोई बीमारी अपने चपेट में जरूर ले ही लेती है और हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और उसके बाद हम बीमारियों को ठीक करने के लिए तरह-तरह की दवाइयों का उयोग करना शुरू कर देते हैं। 

कुछ बीमारी ऐसी होती है जो कुछ समय के अंदर ही ठीक हो जाती हैं और कुछ बीमारियां लंबे समय तक रहती हैं और जल्दी ठीक होने का नाम ही नहीं लेती।

Anulom Vilom ke 15 fayde aur nuksan | अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे और नुकसान

कई ऐसी बीमारियां हैं, जो कभी-कभी योग के माध्यम से भी ठीक हो जाती है जिनका हमें कोई नुकसान भी नहीं होता। ऐसे में एक योग का नाम आता है अनुलोम विलोम। कई योग गुरुओं का मानना है कि अकेले अनुलोम विलोम से हमारे शरीर को कई चमत्कारी फायदे होते हैं। यह प्राणायाम बहुत सारी बीमारियों से बचाने में हमारी सहायता करता है। तो आइए जानते हैं यदि इस प्राणायाम को करना शुरू करते हैं तो आपको क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के क्या-क्या फायदे होते हैं? Anulom vilom ke fayde

अनुलोम विलोम (नाड़ी शोधन) अकेला एक ऐसा प्राणायाम है जिसको करने मात्र से ही कई प्रकार के चमत्कारी परिणाम हमें प्राप्त हो जाते हैं। यदि इस प्रकार के प्राणायाम का अभ्यास प्रतिदिन सुबह और शाम के समय केवल 15 मिनट ही किया जाए तो शरीर के सभी नदियों का शुद्ध हो जाता है और इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को बढ़ाने में भी हेल्प करता है। 

इस प्राणायाम को करने में यदि अपना कुछ समय दिया जाए तो आपका दिमाग भी फ्रेश रहता है तो आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में जिनको जानकर आप भी अपने दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहेंगे।

फेफड़ों को ताकतवर बनाने में- अनुलोम-विलोम एक ऐसा प्रणाम है जिसमें सबसे ज्यादा असर होता है आपके फेफड़ों पर, जो फेफड़ों में जमी हुई विषैली गैस को बाहर निकालने का कार्य करता है। और उन्हें स्वस्थ बनाने के साथ-साथ मजबूत भी बनाता है जिससे उनकी ताकत बढ़ती है। 

जिन्हें स्मोकिंग करने की आदत होती है अक्सर उनका फेफड़ा कमजोर हो जाता है। यदि वे लोग स्मोकिंग छोड़कर यदि इस प्राणायाम को करने की आदत डाल दें तो उनका भी फेफड़ा फिर से काफी हद तक दुरुस्त हो सकता है।

अनुलोम विलोम का कैंसर में लाभ- कई ऐसे चिकित्सक भी हैं जो योग के लाभ को मान गए हैं प्रतिदिन लगातार अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास किया जाए तो कैंसर की गांठें जो है वो समाप्त हो सकती हैं यह बात शायद विश्वास करना मुश्किल हो, लेकिन प्रणाम करने से आपको कुछ ना कुछ फायदे तो जरूर होंगे।

सांस की समस्या को करे दूर- जिन्हें सांस से संबंधित कोई परेशानी है या बीमारी है। या फिर कुछ लोगों को आपने देखा होगा कि वो जोर-जोर से सांस लेते हैं उनके लिए यह प्राणायाम एक रामबाण की तरह काम करेगा। 

उन्हें आज से ही इस परिणाम को करने की आदत डाल देनी चाहिए। इसे करने के बाद सांस लेने की समस्या ठीक हो जाती है और फेफड़ों तक ऑक्सीजन ठीक से पहुंच पाता है।

अनुलोम विलोम के अन्य फायदे

  1. यह ब्लड परिसंचरण में सुधार लाकर आपके मन को शांत करता है।
  2. यह प्राणायाम वात कफ और पित्त तीनों प्रकार के दोषों को दूर करने में काफी सहायक होता है।
  3.  जिन्हें शुगर की बीमारी है वह लोग इस प्राणायाम को नियमित रूप से करके रक्तचाप और शुगर की बीमारी को बिल्कुल ठीक कर सकते हैं।
  4. मांसपेशियों से संबंधित रोग, पेट फूलना और अम्लता में लाभदायक है।
  5. ऐसे प्राणायाम को करने से आपकी सोच नकारात्मक हो जाती है और आप तनाव, क्रोध, चिंता, विस्मृति, बेचैनी, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन और जिन्हें नींद की समस्या है उसे दूर कर सकते हैं।
  6. टेंशन और चिंता से छुटकारा दिलाने में काफी फायदेमंद होता है।
  7. गैस कब्ज एसिडिटी की समस्या और जिन्हें खर्राटे लेने की आदत होती है इससे भी छुटकारा दिलाने में लाभदायक होता है।
  8. इस परिणाम को नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो मोटापे को नियंत्रण किया जा सकता है।
  9. कुछ लोगों को बीती हुई बातों पर पछतावा करते हैं और भविष्य में उसके बारे में सोच कर चिंतित रहते हैं जो हर एक मानव की एक प्रवृत्ति है। अनुलोम-विलोम एक ऐसा प्रणाम है जो मन को वर्तमान क्षण में वापस लाने में सहायता करता है।
  10. यह प्राणायाम ब्रेन और फेफड़े को मजबूत बनाता है।
  11. इसे नियमित रूप से प्रतिदिन किया जाए तो आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है जिसके कारण छोटी मोटी बीमारियां आपसे दूर रहती हैं।
  12. अनुलोम विलोम आपकी बॉडी को डिटॉक्स करता है जिसके कारण चेहरे पर ग्लो आता है और ढलती उम्र को भी कम कर देता है।
  13. जो लोग गठिया की बीमारी से पीड़ित हैं उन्हें मसाज थेरेपी के साथ इस प्राणायाम को शामिल करते हैं तो काफी ज्यादा प्रभावकारी हो सकता है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने का सही तरीका- anulom vilom Pranayam karne ka Sahi tarika

कई लोगों का सवाल रहता है क्या अनुलोम विलोम कैसे करें और इस प्राणायाम को करने का सही तरीका क्या है, कुछ लोगों का सवाल होता है कि क्या इसे बिस्तर पर बैठकर, लेट कर या कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं या नहीं। 

दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगा कि तीनों तरीके से कर सकते हैं केवल आपको ध्यान देना है कि आपकी कमर और गर्दन हमेशा सीधी होनी चाहिए।

ये बेहद जरूरी है। क्योंकि आपके फेफड़े को पूरी तरह से जगह मिल जाती है जिससे आपको पूरा पूरा फायदा मिलता है।

कुछ लोगों का सवाल आता है कि क्या इस परिणाम को हम लेट कर कर सकते हैं तो हमारा जवाब है कि इसे लेट कर नहीं कर सकते हैं।

  • सबसे पहले आप सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं। ध्यान रहे कमर और गर्दन सीधी रखनी हैं।
  • उसके बाद दाहिने हाथ को वायु मुद्रा में कर लेना है (यानी कि इंडेक्स उंगली को मोड़ कर अंगूठे से दबाना होता है)
  • और बाएं हाथ को चिन मुद्रा में रखना है।

तो आइए जानते हैं आगे की प्रक्रिया कि इस प्राणायाम को कैसे करें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम कैसे करें- anulom vilom Pranayam kaise karen

आप अनुलोम विलोम शुरू करने से पहले आपको किस अवस्था में बैठना है और अपने हाथों को किस अवस्था में रखना है यह बात आपको पूरी तरह समझ में आ गया होगा जो ऊपर के आर्टिकल में बताया गया है अब जानते हैं कैसे करना है-

  • सबसे पहले अपने वायु मुद्रा वाले अंगूठे से दाहिने वाले नाक को बंद कर लेना है
  • और बाएं वाले नाक से सांस लेंगे।
  • सांस लेने के बाद बाई वाली नाक को बीच वाली अंगुली से बंद करें,
  • और फिर दाहिने नाक से सांस को बाहर निकालें।
  • फिर यही प्रक्रिया आपको दोहरानी है

अनुलोम विलोम दिन में कितनी बार करना चाहिए?

अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास रोज सुबह और शाम बिना कुछ खाए 5 से 15 मिनट तक दिन में 2 से 3 बार बार नियमित रूप से करना चाहिए।

अनुलोम विलोम कब और कितनी देर तक करना चाहिए?

किसी भी प्राणायाम को सुबह का समय ही करना बेहतर माना जाता है। अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने का सबसे अच्छा समय है सुबह दिन निकलने के कुछ समय पहले किया जाए।

इस प्राणायाम को करने के लिए आप 5 से 15 मिनट तक का समय दे सकते हैं।

यदि आप 5 मिनट तक नहीं कर सकते तो ना ही सही आप केवल 2 मिनट ही कीजिए।

इसका मतलब यह है कि आपसे जितना हो सके उतना ही कीजिए उससे भी आपको लाभ बहुत मिलेगा।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के नुकसान-Anulom Vilom ke nuksan

वैसे तो किसी भी प्रकार के योग को करने से कोई हानि नहीं होती ठीक वैसे ही अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने कर कोई नुकसान नहीं होता है। परंतु इसे अगर गलत तरीके से किया जाए तो आपके लिए जरूर नुकसानदायक हो सकता है। इस योग को करने पर कुछ सावधानियों को जरूर बरतना चाहिए जैसे-

  • इस परिणाम को करने के पश्चात तुरंत स्नान नहीं करना चाहिए।
  • कभी भी अनुलोम विलोम करने के तुरंत बाद किसी भी प्रकार का भोजन नहीं करना चाहिए।
  • इस प्राणायाम को करते समय आप जितनी देर तक करने में सक्षम होते हैं, उतने ही देर तक करना चाहिए।
  • जिन्हें सांस से संबंधित कोई परेशानी या दिक्कत हो, जैसे अस्थमा इत्यादि तो उन्हें भी इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए।
  • हार्ट के मरीज को भी इस  प्राणायाम को करने से बचना चाहिए।
  • जब भी इस प्राणायाम को करें कम से कम 3 से 4 घंटे पेट को खाली रखें उसके बाद ही करें।
  • अनुलोम विलोम जैसे प्राणायाम को करने के पश्चात किसी भी प्रकार का चाय कॉफी कोल्ड ड्रिंक और शराब जैसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • शुरुआती दौर में, आप सब कुंभक पर ज्यादा ध्यान ना दें, और बिना जाने सांस को रोकने का प्रयास भी ना करें।
  • हमेशा साफ और स्वच्छ स्थानों पर ही इस प्राणायाम को शुरू करें।
  • जिन्हे शरीर में कमजोरी महसूस होती हो, या फिर उन्हें किसी बीमारी के चलते कमजोरी आ गई हो तो उन्हें भी अनुलोम विलोम प्राणायाम से बचना चाहिए।
  • जिनको इस प्रणाम को करते समय सांस लेने में कोई परेशानी आए तो उन्हें इस प्राणायाम को रोक देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • जिन लोगों का किसी प्रकार का ऑपरेशन या सर्जरी हुई है तो उन्हें इस प्राणायाम को करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेकर शुरू करना चाहिए
  • जिन्हें एनीमिया से संबंधित कोई बीमारी है या फिर उनको बार-बार चक्कर आते हैं तो उन्हें भी पहले डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए।
Conclusion:

वैसे देखा जाए तो अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के बहुत सारे फायदे होते हैं लेकिन फिर भी हमने इस आर्टिकल के माध्यम से उन सारे फायदे और नुकसान के बारे में चर्चा किया है और यह भी बताने का प्रयास किया है कि इस योग को करने का सही तरीका क्या है जो आप जान चुके हैं उम्मीद है आपको हमारा यह लेख जरूर पसंद आया होगा।

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