कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे, सही नियम और तरीका | Kapalbhati yoga kaise karte hain

कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे, सही नियम और तरीका | Kapalbhati yoga kaise karte hain

कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे, सही नियम और तरीका–Kapalbhati yoga kaise karte hain यदि प्रतिदिन केवल 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करने के लिए समय दिया जाए तो हम नाना प्रकार की बीमारियों से दूर रह सकते हैं। इस परिणाम को करने के दौरान हमारा ब्लड सरकुलेशन बेहतर रहता है। और जिनका माइंड शांत नहीं रहता उनको भी लाभ मिल जाता है।

योग करते रहने से आपका माइंड और शरीर हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। Kapalbhati yoga kaise karte hain इस योग को यदि प्रतिदिन किया जाए तो पुराना से पुराना रोग भी चुटकियों में छूमंतर हो जाता है। 


यदि आप वास्तव में रोग मुक्त रहना चाहते हैं तो कपालभाति प्राणायाम प्रतिदिन करने का आदत डाल दीजिए। 


कोई इस व्यायाम को नियमित रूप से करने की आदत डाल देता है तो उसे शायद ही कोई और योग या प्राणायाम करने की जरूरत पड़ेगी।


जब हम इस योग को करने लगते हैं तो हमारे शरीर से 80 प्रतिशत विषायुक्त पदार्थ सांस के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। कपालभाति प्राणायाम प्रतिदिन नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो हमारा शरीर डिटॉक्स हो जाता है।


कपालभाति प्राणायाम करने का सही नियम

  • सुबह जल्दी उठे।
  • जब भी कपालभाति प्राणायाम को करें उस समय बिना तनाव के और दिमाग को शांत रखें।
  • इस योग को हमेशा शौच करने के बाद ही शुरू करना चाहिए।
  • किसी भी प्रकार का योग हो, या प्राणायाम करने से पहले और नाही तुरंत बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए।
  • आधा घंटा पहले पानी पिया जा सकता है।
  • यदि आप शाम को भी करना चाहते हैं तो हमेशा खाना खाने के लगभग 4 घंटे पश्चात ही इस प्राणायाम को शुरू करें।

कपालभाति कैसे करते हैं, क्या है करने का सही तरीका और समय-kapalbhati kaise karte hain


कपालभाति प्राणायाम करने से पहले इसके सही नियम को एक बार जरूर ध्यान में रख ले, क्योंकि कई लोगों का यह सवाल रहता है कि kapalbhati kaise karte hain? इस योगासन को सही तरीके और समय पर ना किया जाए तो आपको इसका पूरा पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।


इसका पूरा लाभ लेने के लिए इसके नियम को पालन करना बहुत आवश्यक होता है।

  1. इस योग को करने से पहले एक शांत एरिया ढूंढ ले,
  2. सबसे पहले कपालभाति प्रणाम करने के लिए वज्रासन या सुखासन में बैठ जाएं और अपनी कमर को सीधा रखते हुए कंधे और गर्दन को भी बिल्कुल सीधा रखें।
  3. आपके दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में होने चाहिए। (हाथों को घुटनों पर रखें तथा अंगूठे और पास वाली उंगली दोनों एक साथ सट्टे होने चाहिए बाकी सभी उंगलियां सीधा रखें)
  4. अब आपको पेट अंदर की तरफ सिकुड़ते हुए एक लम्बी सांस लेना है और सांस को छोड़ना है।
  5. आपका पूरा ध्यान सांस को बाहर और अंदर करने की प्रक्रिया पर होना चाहिए।
  6. यह प्रक्रिया लगातार नाक के दोनों क्षेत्रों से सिर्फ पेट में नहीं छोड़ते हुए बल के सहारे सांस को बाहर निकालते रहना है।
  7. इस प्रक्रिया को 1 मिनट में लगभग 50 से 60 बार करने का प्रयास करें।
  8. यदि आपको इस प्रक्रिया को करते समय थकान महसूस हो तो थोड़ी देर आराम करें और फिर से दोहराएं।
  9. इस प्राणायाम को करते हुए स्ट्रोक की संख्या को 1 मिनट में 100 तक करने का अभ्यास करें।

कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे


कपालभाति प्राणायाम करने के अनेकों फायदे हैं इस परिणाम को करने से शरीर को फायदे तो होते ही हैं साथी मन की समस्याओं को भी प्रभावी तरीके से दूर करता है यदि इस प्राणायाम को प्रतिदिन सही तरीके से करते हैं तो एक ही महीने के अंदर इसका लाभ आपको देखने को मिल सकता है तो आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में-

  • कपालभाति प्राणायाम करने से शरीर में गर्मी उत्पन्न नही होती है।
  • हमारे बॉडी से टॉक्सिन और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी सहायता करता है।
  • यह गुर्दे, किडनी और लीवर के कार्य में सुधार लाता है।
  • यहां आंखों से स्ट्रेस को दूर करने के साथ डार्क सर्कल को मिटाने हेल्प करता है।
  • यह खून के बहाव और पाचन को सुधरता है।
  • जिनका वजन बढ़ा हुआ है उसे कम करने में हेल्प करता है।
  • यह पेट के अंदर वाले भागों को स्टिम्युलेट करता है
  • शुगर वाले रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है।
  • यह प्राणायाम दिमाग को एक्टिव करता है और नसों को सक्रिय करता है।
  • ये मन को शांत करता है।
  • यह आपके अंदर संतुलन और संवेदनशीलता की भावना को संतुलन करता है।
  • इस बयान को करने से एसिडिटी और गैस से संबंधित बीमारियों को समाप्त करता है।
  • कपालभाति को करने से फेफड़ा मजबूत होता है तथा उनकी क्षमता बढ़ जाती है।
  • इस प्राणायाम को करते रहने से आप हमेशा एक्टिव महसूस करेंगे।
  • यह प्राणायाम आपके चेहरे पर निखार लाता है।
  • इस प्राणायाम से स्मृति और एकाग्रता बनी रहती है।
  • यह अस्थमा और साइनस की बीमारी को ठीक करने में हमारे हेल्प करता है।

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